This occasion encourages us to make profound connections with our internal selves, which promotes spiritual progress and peace. This holy year reminds us the Main of devotion is the purity of our hearts and the sincerity of our prayers.
सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)
पूजा के लिए एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें। वहां गंगाजल का छिड़काव करके स्थान को पवित्र करें।
मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा
शनिवार से गुप्त नवरात्रि, कैसे करें पूजा, जानें विधि और पूजन सामग्री
व्रत और नियम: गुप्त नवरात्रि में व्रत रखना अत्यधिक फलदायी होता है।
डॉ. कुणाल कुमार झा ने बताया कि इस नवरात्रि में साधक लोग पूरे विश्व के भले के लिए साधना करेंगे, जिससे अच्छा फल मिले. यह नवरात्रि तंत्र साधकों के लिए खास मानी जाती है, जो अपनी तंत्र साधना को दूसरों से छिपाकर करते हैं.
नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें और विचारों को पवित्र रखें।
* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
मंत्र साधना: साधक अपनी साधना के अनुसार गुरु से प्राप्त मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई,
मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में सजाएं।
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गुप्त नवरात्रि का यह पावन समय साधकों के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है। इसका पालन श्रद्धा और नियम के साथ करने से जीवन में अद्भुत परिवर्तन संभव है।
ना करे रक्षा तो महाबली भैरव की दुहाई।।